नमस्ते दोस्तों, में आज आपके साथ एक ऐसी मजेदार घटना सांझा करने जा रही हूं जो मुझे आज भी अकेले में हंसने के लिए मजबूर कर देती है उम्मीद है आपको भी जरूर हंसाएगी तो अब स्टोरी शुरू करती हु ,।एक बार की बात है में छत पर बैठी थी अचानक से मेने देखा की सामने वाले घर की बालकनी में एक बंदर है और बड़ा ही शांत बैठा है । बेसे मुझे बंदरों से डर लगता है लेकिन उस दिन मुझे डर नही लग रहा था क्योंकि वो गुर्रा नहीं रहा था शांति से बेटा था मेने सोचा बंदर को कुछ खिलाती हु में नीचे किचन में गई और दो पूड़ी लेकर आई हमारे यहां श्राद्ध था बाबा का इसलिए पूड़ी बना थी मेने सामने आंटी की बालकनी में बंदर के लिए पूड़ी फेंक दी ।,, अब शुरू हुआ बंदर का तमाशा बंदर ने पूड़ी उठाई और अपनी नाक के पास पूड़ी ले गया और सूंघने लगा और मुंह बनाते हुए पूड़ी को झटके से फेंक दिया दोस्तो बंदर ने इतना सड़ा मुंह बनाया जैसे पूड़ी घी में नही घासलेट में तली हो और उसके बाद दोनो हाथो को कस कर दीवाल पर रगड़ने लगा मुझे उस समय बंदर पर इतना गुस्सा आया पर क्या कर सकते है में फिर नीचे आ गई और थोड़ी देर बाद जब दोबारा ऊपर गई वही बंदर पूड़ी को हाथो में गुमा घुमा के खा रहा था बो घटना आज भी सोचती ही तो हंसी आ जाती। है दोस्तो उम्मीद करती हु आपको भी ये घटना कुछ अलग सी लगी होगी धन्यवाद ।